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सोच पुनीत की

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राहुल गाँधी के भाषण पर एक आम आदमी का बयान

Posted On: 20 Jan, 2013 Others में

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आज उपाध्यक्ष पद पर ताजपोशी के पारिवारिक अश्रुपूर्ण समारोह में राहुल गाँधी द्वारा जो भाषण दिया,उसमे यह समझ में ही नहीं आया कि वे सत्तारूढ़ दल के द्वितीय सर्वाधिक शक्तिशाली नेता की हैसियत से बोल रहे थे या कोई समाज सुधारक की हैसियत से। वे सत्ता में सुधार के जो सब्जबाग दिखा रहे थे, उनकी याद उन्हें उपाध्यक्ष बनकर ही क्यों आयी, जबकि वे स्वयं 8 सालों से देश की सत्ता की चाभी परोक्षतः अपने हाथों में लिए हुए हैं। आशा थी कि दिल्ली हेमराज, सुधाकर सिंह और दामिनी को श्रद्धांजलि देंगे, महंगाई, दिल्ली रेप और पाकिस्तान की अमानवीय हरकतों पर कुछ कहेंगे, नक्सलवाद, तेलंगाना, लोकपाल, पुलिस सुधार, ओवैसी प्रकरण, रिटेल में ऍफ़ डी आई, पाकिस्तान ,चीन, ईरान और अमेरिका आदि देशों से संबंधों, आर्थिक नीति, एल पी जी की राशनिंग, पेट्रोलियम पदार्थों को बाज़ार के हवाले करने, बजट से डेढ़ महीने पहले ही रेल तथा पेट्रोल, डीज़ल आदि के दाम बढाने के औचित्य की चर्चा करेंगे। उपलब्धियां गिनाने तथा गौरवशाली अतीत पर गर्व कर लेने भर से आपके कर्त्तव्य की इतिश्री नहीं हो जाती राहुल जी। आपको अपने पूरे भाषण के दौरान इसी बात की चिंता सताती रही कि हिंदी में भाषण देने से आपके दक्षिण के मतदाता नाराज़ न हो जाएँ।इसीलिए आपने अंग्रेजी हिंदी के मिश्रण की बेमेल खिचडी पकाई उससे आपकी माताजी या आपके चापलूस दरबारी ही गदगद हो सकते हैं आम जनता नहीं। आपको आम जनता के सामने इस बात का आश्वासन देना चाहिए था कि हम महंगाई नहीं बढ़ने देंगे और इसके लिए हमारे पास क्या कार्ययोजना है, इसके अलावा गरीबी, बेरोज़गारी, आतंकवाद स्त्रियों को उत्पीडन से बचाने के लिए यदि आप कोई रोड मैप लेकर आते तो शायद जनता पर आपकी बातों का असर भी होता। आपने हिंदुस्तानी डी एन ए होने, हर प्रांत में प्रधानमंत्री पद के लिए योग्य 10-12 उम्मीदवार होने, प्रत्येक ब्लोक और जिले में मुख्यमंत्री पद के लिए सुयोग्य 40-50 लोग होने की ठकुरसुहाती बातें करके तालियाँ भले ही बजवा ली हों लेकिन यह तो आप और आपके दरबारी भी जानते हैं कि प्रधानमंत्री का पद आपके लिए आरक्षित किया जा चूका है और जयपुर में इस दिशा में आपको एक कदम आगे बढ़ा दिया गया है और मुख्यमंत्रियों के पद भी आपकी कृपा के ही मोहताज रहने वाले है।क्या आपने इतना साहस किया कि आप अपनी माताजी से कहते कि आप 15 सालोँ से अध्यक्ष पद पर जमी हुई हैं, इस्तीफ़ा दीजिये और किसी सुयोग्य कांग्रेसी को  ईमानदारी से इस पद पर आने दीजिये और मैं भी इस पद पर वंशानुगत तौर पर नहीं आना चाहता, बल्कि योग्यता से आना चाहता हूँ। 1929 के लाहौर अधिवेशन में मोतीलाल नेहरु ने जिस तरह से लन्दन से बुलाकर अपने पुत्र जवाहरलाल को सत्ता की कमान सौंपी थी, उसके बाद इंदिरा, संजय, राजीव, सोनिया और राहुल की यह परंपरा इतिहास की उसी चूक की पुनरावृत्ति लगती है क्योंकि फ़िलहाल राहुल गाँधी ने आज तक महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर प्रायः चुप्पी ही साधी है और उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश और बिहार के चुनाव हार की है। वे इलाहाबाद, नॉएडा आदि अनेक स्थानों पर कई बार नासमझी भरे बयान देकर अपनी अपरिपक्वता ही सिद्ध करते आए हैं, ऐसे में उन्हें महासचिव से उपाध्यक्ष बनाने पर मचा होहल्ला व्यर्थ का मालूम पड़ता है।बल्कि मेरे ख्याल से महासचिव का पद उपाध्यक्ष से अधिक सक्रियता का पद था, इससे हटाकर उनकी निष्क्रियता पर ही मुहर लगाई गई है या फिर उनके अध्यक्ष पद पर आने का रास्ता बनाया गया है। एक आम आदमी के तौर पर मेरी तो यही सोच है।


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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

vaidya surenderpal के द्वारा
January 22, 2013

पुनीत जी नमस्कार , केवल घड़ियाली आँसू बहाने से तो कोई परिपक्व नहीँ हो जाता । अच्छे आलेख के लिए आभार ।

    January 24, 2013

    आपने मेरे लेख को ध्यानपूर्वक पढ़ा, इसके लिए आपका ह्रदय से आभार

yogi sarswat के द्वारा
January 21, 2013

1929 के लाहौर अधिवेशन में मोतीलाल नेहरु ने जिस तरह से लन्दन से बुलाकर अपने पुत्र जवाहरलाल को सत्ता की कमान सौंपी थी, उसके बाद इंदिरा, संजय, राजीव, सोनिया और राहुल की यह परंपरा इतिहास की उसी चूक की पुनरावृत्ति लगती है क्योंकि फ़िलहाल राहुल गाँधी ने आज तक महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर प्रायः चुप्पी ही साधी है और उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश और बिहार के चुनाव हार की है। परिवार की ही पार्टी है कांग्रेस ! राहुल ने कहा की कांग्रेस गाँधी की पार्टी है , लेकिन वो गाँधी की नहीं गांधियों की पार्टी है ! अच्छा लेखन श्री बिसारिया जी !

    January 24, 2013

    आपने मेरे लेख को ध्यानपूर्वक पढ़ा, इसके लिए आपका ह्रदय से आभार योगी जी

munish के द्वारा
January 21, 2013

आदरणीय पुनीत जी, जिन विषयों पर आपने सोचा है की राहुल जी को बोलना चाहिए था ……. उन विषयों पर बोलने के लिए थोड़े बहुत ज्ञान की आवश्यकता होती है …….. और राहुल बाबा अभी ……….. ( सब कुछ में ही लिखूं कुछ आप भी समझ लीजिये )

    January 24, 2013

    आपने मेरे लेख को ध्यानपूर्वक पढ़ा, इसके लिए आपका ह्रदय से आभार मुनीश जी


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